अमृत स्नान तिथियाँ
-
अमृत स्नान
पहला अमृत स्नान
सिंहस्थ महाकुंभ का पहला पवित्र स्नान दिवस।
2 अगस्त 2027 · पूरा दिन
-
अमृत स्नान
दूसरा अमृत स्नान
सिंहस्थ महाकुंभ का दूसरा पवित्र स्नान दिवस।
31 अगस्त 2027 · पूरा दिन
-
अमृत स्नान
तीसरा अमृत स्नान
सिंहस्थ महाकुंभ का तीसरा पवित्र स्नान दिवस।
रामतीर्थ, नासिक
11 सितम्बर 2027 · पूरा दिन
-
अमृत स्नान
तीसरा अमृत स्नान
सिंहस्थ महाकुंभ का तीसरा पवित्र स्नान दिवस।
कुशावर्त तीर्थ, त्र्यंबकेश्वर
12 सितम्बर 2027 · पूरा दिन
शाही स्नान से अमृत स्नान तक
एक हालिया पारंपरिक बदलाव यह है कि शाही स्नान शब्द के स्थान पर अब "अमृत स्नान" शब्द शासकीय स्तर पर प्रयोग होने लगा है। यह शब्द प्रयागराज के 2025 के महाकुंभ से प्रचलित हुआ प्रतीत होता है, और महाराष्ट्र शासन ने नासिक के सिंहस्थ की घोषणाओं में भी यही शब्द प्रयोग किया है।
चार कुंभ स्थलों की तुलनाअमृतस्नानों की ग्रहस्थिति
पहला अमृत स्नान, 2 अगस्त 2027 (सोमवार)। उस दिन आषाढ़ अमावस्या है, जो सोमवार को पड़ने के कारण "सोमवती अमावस्या" के नाम से जानी जाती है। परंपरा में सोमवती अमावस्या पर स्नान, दान और पितृकर्म को विशेष महत्त्व दिया जाता है। यहाँ की गई गणना के अनुसार उस सुबह सूर्य और चंद्र कर्क राशि में हैं, चंद्र पुष्य नक्षत्र में है, और गुरु पहले से ही 26 जून से सिंह राशि में है। अमावस्या की तिथि 1 अगस्त की शाम से 2 अगस्त की दोपहर तक चलती है, यानी पूरी भोर और सुबह अमावस्या में आती है। इस प्रकार आषाढ़ में सिंहस्थ प्रवेश के बाद का यह पहला पर्वकाल बनता है।
दूसरा अमृत स्नान, 31 अगस्त 2027 (मंगलवार)। शासन ने इसे "महाकुंभ स्नान" भी कहा है, और गणना से इसका कारण स्पष्ट दिखता है। श्रावण अमावस्या के दिन सूर्य सिंह राशि में लगभग तेरह अंश पर है, चंद्र मघा नक्षत्र में यानी सिंह राशि में है, और गुरु भी सिंह राशि में ही है। अर्थात सूर्य, चंद्र और गुरु तीनों सिंह राशि में एक साथ आते हैं। नासिक कुंभ के लिए बताया गया सबसे आदर्श योग यही है। अमावस्या की तिथि उस दिन तड़के लगभग ढाई बजे शुरू होकर रात लगभग सवा ग्यारह बजे समाप्त होती है, यानी पूरा दिन अमावस्या है। इसलिए इस दिन को सबसे अधिक पुण्यदायी माना जाना स्वाभाविक है।
तीसरा अमृत स्नान, 11 और 12 सितंबर 2027। यह भाद्रपद शुक्ल एकादशी और द्वादशी का समय है। 11 सितंबर (शनिवार) को एकादशी तिथि है जो शाम को देर से समाप्त होती है, और 12 सितंबर (रविवार) को द्वादशी है। भाद्रपद शुक्ल एकादशी को वैष्णव परंपरा में परिवर्तिनी या पद्मा एकादशी कहते हैं, और द्वादशी को वामन द्वादशी। इसलिए योजना यह है कि वैष्णव साधु रामतीर्थ में 11 तारीख को और शैव साधु कुशावर्त में 12 तारीख को स्नान करें। इन दोनों दिनों सूर्य सिंह राशि में ही है (लगभग 24 अंश), गुरु सिंह में है, और चंद्र धनु व मकर राशि में घूम रहा है।
ध्यान रखें कि यहाँ दिए गए विवरण पंचांग की गणना पर आधारित हैं; अंतिम घोषणा पुरोहित संघ, अखाड़ा परिषद और शासन करते हैं, और उनमें किसी भी अंतर को आधिकारिक माना जाए।
सिंहस्थ: ज्योतिषीय आधारअपनी यात्रा की योजना बनाएँ
सिंहस्थ एक लंबा पर्व है, जिसमें केवल अमृत स्नान ही नहीं, अनेक शुभ दिन आते हैं। कम भीड़ वाला दिन चुनने पर दर्शन अधिक शांति से होते हैं और स्नान अधिक सुरक्षित रहता है।
- अमृत स्नान के दिनों में सबसे ज़्यादा भीड़ होती है और ये दिन मानसून के चरम दौर में पड़ते हैं। भीड़ और परिवहन की स्थिति के बारे में आधिकारिक पृष्ठों और समाचारों से लगातार जानकारी लेते रहें।
- अगर आप बुज़ुर्ग हैं, दिव्यांग हैं, अस्वस्थ हैं, गर्भवती हैं या छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो अमृत स्नान के दिनों से बचें।


