ध्वजावतरण वह समारोह है जिससे सिंहस्थ का समापन होता है। 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के समय फहराया गया पवित्र ध्वज उतारा जाता है, और इसके साथ सिंहस्थ का औपचारिक समापन होता है। सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 के लिए यह दिन 24 जुलाई 2028 है।
ध्वजावतरण के साथ वह पावन अवधि पूर्ण होती है जो ध्वजारोहण से शुरू हुई थी। अमृत स्नानों वाली प्रमुख मेला अवधि इसी के बीच, 15 जून से 30 सितंबर 2027 तक है; देखें स्नान कैलेंडर।
समारोह कहाँ होता है
ध्वज वहीं उतारा जाता है जहाँ उसे फहराया गया था, यानी सिंहस्थ के दोनों पावन स्थलों पर: नासिक में रामतीर्थ पर और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ पर, जो एक-दूसरे से लगभग 28 किमी दूर हैं (देखें नासिक और त्र्यंबकेश्वर ही क्यों)। दोनों स्थानों पर साधु-संतों, पुरोहितों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में प्रार्थना और विधि-विधान के साथ ध्वज उतारा जाता है।
ध्वजावतरण का अर्थ
जैसे ध्वज फहराना पावन अवधि के आरंभ की घोषणा है, वैसे ही उसे उतारना उस अवधि के पूर्ण होने का प्रतीक है। कई श्रद्धालुओं के लिए यह बीते सिंहस्थ के लिए आभार व्यक्त करने और लगभग बारह वर्ष बाद आने वाले अगले सिंहस्थ तक उससे विदा लेने का क्षण होता है।
सिंहस्थ एक लंबी पावन अवधि है, केवल प्रमुख मेले के कुछ महीने नहीं। 30 सितंबर 2027 को प्रमुख मेला अवधि समाप्त होने के बाद भी पर्व स्नान के दिन आते रहते हैं, और स्नान कैलेंडर में ये 2028 तक दिए गए हैं; देखें पर्व स्नान और अन्य स्नान दिवस। ध्वजावतरण भी स्नान कैलेंडर में मुहूर्त सहित दिया गया है।
कार्यक्रम और समय
NTKMA तिथि के नज़दीक दोनों स्थानों का कार्यक्रम और समय सूचनाएँ पृष्ठ पर और लाइव अपडेट में प्रकाशित करेगा। ध्वजावतरण का मुहूर्त स्नान कैलेंडर में दिया गया है। यदि समारोह का आधिकारिक लाइव प्रसारण होता है, तो उसका लिंक आधिकारिक लाइव प्रसारण पृष्ठ पर मिलेगा।
सूचनाएँ देखेंअगर आप समारोह में आ रहे हैं
रामतीर्थ और कुशावर्त तीर्थ पर तथा आसपास की गलियों में भीड़ की अपेक्षा रखें; वहाँ तक जाने वाली सड़कों पर यातायात प्रतिबंध भी हो सकते हैं।
- जल्दी पहुँचें, और प्रवेश व निकास की व्यवस्था तथा पुलिस और स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें।
- निकलने से पहले यातायात और मार्ग परिवर्तन की स्थिति देखें।
- बच्चों और परिवार के बुज़ुर्गों को पास रखें, और बिछड़ने की स्थिति में मिलने की जगह पहले से तय कर लें।
- यह समारोह मानसून में होता है: बारिश से बचाव का सामान साथ रखें, घाट की गीली सीढ़ियों पर सावधानी बरतें, और नदी के जलस्तर से जुड़ी किसी भी सूचना का पालन करें।
- पीने का पानी साथ रखें, और क़ीमती सामान घर पर ही छोड़ें।
- बैरिकेड के पीछे रहें, और समारोह स्थल की ओर धक्का-मुक्की न करें।
आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें।


