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पंचवटी और रामायण का संबंध

जिस भूमि पर प्रभु श्रीराम की कथा चलती है

रामायण के अरण्यकांड में ऐसा वर्णन है कि वनवास के तेरह वर्ष पूरे होने पर प्रभु श्रीराम, सीता और लक्ष्मण अगस्त्य ऋषि की सलाह से गोदावरी के तट पर स्थित पंचवटी नामक स्थान पर निवास के लिए आए। यहाँ उन्होंने पर्णकुटी बनाई। पंचवटी अर्थात पाँच वटवृक्षों का समूह, ऐसी लोकप्रिय व्युत्पत्ति है।

इस कथा के कारण पंचवटी के प्रत्येक स्थान को रामायण का स्पर्श प्राप्त हुआ है। सीता गुफा, रामतीर्थ, लक्ष्मण रेखा, तपोवन, कालाराम मंदिर, ऐसे अनेक स्थल यहाँ रामायण की स्मृतियों से जुड़े हुए हैं। वैष्णव भक्तों के लिए यह केवल तीर्थ नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के सान्निध्य से पावन हुई भूमि है। इसीलिए वैष्णव अखाड़ों के लिए रामतीर्थ स्नान का श्रद्धास्थल बना।

इसीलिए नासिक को कुंभस्थल के रूप में महत्व दिलाने वाले घटकों में पंचवटी का स्थान सबसे ऊपर है। वैष्णव साधु रामतीर्थ में स्नान करते हैं, क्योंकि यह स्थान प्रभु श्रीराम के निवास से पावन हुआ है। इस अध्याय में हम रामायण के संबंधित प्रसंग क्रम से देखेंगे, फिर पंचवटी के मुख्य स्थलों से परिचित होंगे, और अंत में देखेंगे कि इस श्रद्धा को इतिहास और साहित्य की दृष्टि से कैसे देखा जा सकता है।

"पंचवटी" नाम का अर्थ

पंचवटी शब्द दो भागों से बना है: पंच यानी पाँच और वटी यानी वृक्षों का वन, विशेषतः वटवृक्ष। लोकपरंपरा के अनुसार इस क्षेत्र में पाँच विशाल बरगद के पेड़ थे, इसलिए इसका नाम पंचवटी पड़ा। आज भी पंचवटी में सीता गुफा के पास पाँच वृक्ष दिखाए जाते हैं।