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भारत का राजचिह्न महाराष्ट्र शासनमहाराष्ट्र सरकारनाशिक जिल्हा · नासिक जिला
नासिक–त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ मेलामहाराष्ट्र शासन की मुद्रा
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सुरक्षा दिशानिर्देश

सिंहस्थ कुंभ मेला एक प्रमुख धार्मिक समागम है, जिसमें लाखों श्रद्धालु, भक्तजन और आगंतुक एक साथ आते हैं। ये दिशानिर्देश व्यावहारिक सलाह देते हैं, ताकि श्रद्धालु अपनी यात्रा की तैयारी कर सकें, भीड़ भरे सार्वजनिक स्थानों में आवाजाही कर सकें, अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकें, आपात स्थितियों से निपट सकें और आधिकारिक सलाह से अवगत रह सकें। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाएँ, अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें और आपातकालीन कर्मियों के साथ सहयोग करें, ताकि सभी के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक रूप से सार्थक अनुभव सुनिश्चित करने में मदद मिले।

अपनी यात्रा की योजना बनाएँ

सिंहस्थ एक लंबा पर्व है, जिसमें केवल अमृत स्नान ही नहीं, अनेक शुभ दिन आते हैं। कम भीड़ वाला दिन चुनने पर दर्शन अधिक शांति से होते हैं और स्नान अधिक सुरक्षित रहता है।

  • सिंहस्थ 31 अक्टूबर 2026 से 24 जुलाई 2028 तक चलेगा। अमृत स्नान के दिन हैं: नासिक में 2 अगस्त, 31 अगस्त और 11 सितंबर 2027, तथा त्र्यंबकेश्वर में 12 सितंबर 2027।
  • स्नान की समय-सारणी, निर्धारित मार्गों, प्रवेश स्थानों और परिवहन सुविधाओं की जानकारी ले लें।
  • अपने आवास, परिवहन और वापसी की योजना पहले से बना लें।
  • अमृत स्नान के दिनों में सबसे ज़्यादा भीड़ होती है और ये दिन मानसून के चरम दौर में पड़ते हैं। भीड़ और परिवहन की स्थिति के बारे में आधिकारिक पृष्ठों और समाचारों से लगातार जानकारी लेते रहें।
  • अगर आप बुज़ुर्ग हैं, दिव्यांग हैं, अस्वस्थ हैं, गर्भवती हैं या छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो अमृत स्नान के दिनों से बचें।
  • केवल पंजीकृत आवास में ही ठहरें और बुकिंग केवल आधिकारिक या भरोसेमंद माध्यमों से ही करें। फ़र्ज़ी बुकिंग वेबसाइटों और एजेंटों से सावधान रहें।
  • यात्रा शुरू करने से पहले मौसम संबंधी अलर्ट और आधिकारिक सलाह देख लें।
  • निर्धारित पार्किंग क्षेत्रों और आधिकारिक पिक-अप और ड्रॉप-ऑफ़ स्थानों का उपयोग करें।
  • यातायात मार्ग परिवर्तनों, पैदल मार्गों और यातायात कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।

कम सामान लेकर चलें

घनी भीड़ में भारी सामान आपकी गति धीमी कर देता है और आपको तथा दूसरों को ख़तरे में डालता है।

  • केवल 1-2 बैग ही साथ रखें। गहने, क़ीमती सामान और भारी सामान अपने तय आवास पर छोड़ दें।
  • ज़रूरी सामान:
    • मूल फ़ोटो पहचान पत्र
    • आपकी नियमित दवाइयाँ
    • रेनकोट (भीड़ में छाते से बेहतर)
    • छोटी टॉर्च
    • पानी की बोतल
    • एक जोड़ी सूखे कपड़े
  • परिवार के हर बच्चे और बुज़ुर्ग सदस्य की जेब में एक कार्ड रखें, जिस पर नाम, फ़ोन नंबर और पता (और ज़रूरत हो तो स्वास्थ्य स्थिति) लिखा हो।

घाट की ओर जाते समय

  • जिस घाट पर आप जाना चाहते हैं, उसे केवल निर्धारित और आधिकारिक रूप से सूचीबद्ध घाटों में से पहले ही तय कर लें।

भीड़ में

भीड़ में होने वाली ज़्यादातर दुर्घटनाएँ तब होती हैं जब लोग हड़बड़ी करते हैं, संकरी जगहों पर रुक जाते हैं या बैरिकेड पर धक्का देते हैं। धैर्य ही सबसे अच्छा बचाव है, आपके लिए भी और आपके आसपास के सभी लोगों के लिए भी।

  • घाटों की ओर पैदल जाते समय केवल निर्धारित प्रवेश व निकास मार्गों, बैरिकेड, कतार व्यवस्था और अधिकारियों के निर्देशों का ही पालन करें।
  • अगर आप परिवार और मित्रों के साथ हैं, तो बिछड़ जाने की स्थिति के लिए अपने समूह के साथ मिलने की एक जगह पहले से तय कर लें।
  • भीड़ भरे रास्तों में प्रवेश करते समय आपातकालीन निकास और वैकल्पिक रास्ते पहचान लें और उन्हें ध्यान में रखें।
  • रास्तों, पुलों, घाट की सीढ़ियों या संकरी गलियों में, या बैरिकेड के पास न बैठें, न सोएँ और न रुकें।
  • बैरिकेड पर कभी न चढ़ें और न ही उन्हें तोड़ें।
  • अगर भीड़ धक्का दे, तो शांत रहें, अपनी बाँहें सीने के सामने रखें और बगल की ओर हटते हुए दबाव से बाहर निकलें।
  • अफ़वाहों पर न विश्वास करें, न उन्हें फैलाएँ। केवल आधिकारिक घोषणाओं का पालन करें।
  • अखाड़ों की शोभायात्राओं को रास्ता दें। शोभायात्रा के मार्ग को पार न करें।

घाटों पर

  • केवल दिन के उजाले में ही स्नान करें।
  • गहरे या तेज़ बहाव वाले पानी में न जाएँ।
  • डुबकी जल्दी लगाएँ और आगे बढ़ जाएँ।
  • पानी के पास बच्चों का हाथ हर समय पकड़े रहें।
  • जीवनरक्षकों, बचाव दलों और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
  • पहाड़ियों में भारी बारिश होने पर या नदी के ऊपरी हिस्से के बाँधों से पानी छोड़े जाने पर गोदावरी का जलस्तर कुछ ही घंटों में बढ़ सकता है। आपकी सुरक्षा के लिए घाट कम समय की सूचना पर बंद किए जा सकते हैं।
  • अगर कोई घाट बंद हो या जलस्तर ऊँचा हो, तो नदी में न उतरें, भले ही उस दिन आपका स्नान पहले से तय हो।

बच्चे, बुज़ुर्ग और दिव्यांगजन

भीड़ में बच्चे, बुज़ुर्ग और दिव्यांगजन सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं, और वही सबसे आसानी से खो जाते हैं।

  • सुनिश्चित करें कि बच्चों को किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति का नाम पता हो, और यह भी पता हो कि अधिकृत कर्मियों से मदद कैसे माँगें।
  • बच्चों और बुज़ुर्गों की जेब में पहचान की जानकारी वाला एक काग़ज़ रखें।
  • उन्हें अपने पास रखें, और सबसे घनी भीड़ से दूर रखें।
  • बच्चों को सिखाएँ कि अगर वे बिछड़ जाएँ, तो जहाँ हैं वहीं रुके रहें और किसी पुलिसकर्मी के पास जाएँ।
  • अगर कोई खो जाए, तो तुरंत निकटतम खोया-पाया केंद्र या पुलिस बूथ पर जाएँ।

मानसून, बाढ़ और भूस्खलन

नासिक ज़िले में, ख़ासकर त्र्यंबकेश्वर और आसपास की पहाड़ियों में, मानसून के दौरान बहुत भारी बारिश होती है। ढलानें फिसलन भरी हो जाती हैं, भूस्खलन से सड़कें बंद हो सकती हैं, और नदियों व नालों में जल्दी बाढ़ आ सकती है।

  • भारी बारिश और बाँधों से छोड़ा गया पानी गोदावरी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा सकता है। चेतावनी का सायरन या घोषणा सुनाई दे, तो नदी का किनारा छोड़ दें।
  • ब्रह्मगिरि, अंजनेरी या अन्य पहाड़ियों पर रात में, बारिश के दौरान या अकेले न चढ़ें। चिह्नित रास्तों पर ही रहें।
  • भारी बारिश के दौरान पहाड़ी घाट मार्गों, खड़ी ढलानों, मिट्टी रोकने वाली दीवारों, नालों और झरनों से बचें।
  • भारी बारिश, गरज-चमक वाले तूफ़ान, आकाशीय बिजली या तेज़ हवाओं के दौरान निर्देश मिलने पर निर्धारित सुरक्षित आश्रय स्थल पर चले जाएँ।
  • जलभराव और भूस्खलन से जुड़ी चेतावनियों का पालन करें, और पानी भरी सड़कों पर न पैदल चलें, न गाड़ी चलाएँ।
  • बादल गरजने और बिजली चमकने के दौरान किसी इमारत या वाहन के अंदर चले जाएँ। पेड़ों, खंभों और खुले पानी से दूर रहें।

गर्मी और उमस

मानसून में बादलों वाले दिनों में भी, खचाखच भरी भीड़ की गर्मी और उमस शरीर को जल्दी थका सकती है।

  • नियमित रूप से पानी पिएँ, और अगर बहुत पसीना आए तो ओआरएस (ORS) पिएँ।
  • हल्के, ढीले सूती कपड़े पहनें, और सीधी धूप में देर तक इंतज़ार करने से बचें।
  • चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी या भ्रम गर्मी से होने वाली बीमारी का संकेत हो सकते हैं। छाया में जाएँ और तुरंत मदद लें।

आग और बिजली से सुरक्षा

गीली परिस्थितियों में बिजली का झटका लगने का ख़तरा बढ़ जाता है।

  • टेंट के अंदर खाना न पकाएँ, और न ही मोमबत्ती, दीये या अगरबत्ती जलाएँ।
  • बिजली के खंभों, तारों, लाइटों या पैनलों को न छुएँ, ख़ासकर जब वे गीले हों।
  • चिंगारी छोड़ते तारों या धुएँ की सूचना तुरंत निकटतम पुलिस या अग्निशमन चौकी को दें।
  • अपने शिविर या आवास के निकास द्वारों की जानकारी रखें।

व्यक्तिगत सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव

बड़ी भीड़ जेबकतरों और ठगों को अपनी ओर खींचती है। सतर्क रहें और केवल अधिकृत लोगों से ही मदद लें।

  • अपना फ़ोन और पैसे अंदर की जेब में, या अपने सामने पकड़े हुए छोटे बैग में रखें।
  • केवल वर्दीधारी पुलिस से, और पहचान पत्र वाले अधिकारियों व स्वयंसेवकों से ही मदद लें।
  • बच्चों या सामान को अजनबियों के हवाले न करें।
  • दर्शन, पास या आवास के लिए पैसे माँगने वाले कॉल या संदेशों से सावधान रहें।
  • मुसीबत में फँसी महिलाएँ और बच्चे किसी भी पुलिस बूथ पर जा सकते हैं या 181 या 1098 पर कॉल कर सकते हैं।

सम्मान और स्वच्छता

गोदावरी लाखों लोगों के लिए पवित्र है। नदी और मेला क्षेत्र को स्वच्छ रखना सबकी ज़िम्मेदारी है।

  • निर्धारित शौचालयों, हाथ धोने की सुविधाओं और कचरा निपटान स्थलों का उपयोग करें।
  • प्लास्टिक, भोजन का कचरा और अन्य कूड़ा निर्धारित कूड़ेदानों में डालें।
  • गोदावरी में साबुन, शैम्पू या डिटर्जेंट का उपयोग न करें।
  • फूल और पूजा सामग्री केवल निर्धारित स्थानों पर ही रखें।
  • अनुमति के बिना अखाड़ा शिविरों में प्रवेश न करें। साधुओं और उनके रीति-रिवाजों का सम्मान करें।

सूचित रहें

  • केवल NTKMA, पुलिस और ज़िला प्रशासन के आधिकारिक माध्यमों पर दिए गए अपडेट पर ही नज़र रखें।

आपातकालीन नंबर

सेवानंबर
आपातकाल (पुलिस, अग्निशमन, एम्बुलेंस)112
एम्बुलेंस108
अग्निशमन101
स्वास्थ्य हेल्पलाइन104
आपदा नियंत्रण कक्ष1077
बाल हेल्पलाइन1098
महिला हेल्पलाइन181