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नासिक–त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ मेलामहाराष्ट्र शासन की मुद्रा
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नासिक और त्र्यंबकेश्वर ही क्यों

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ मेला: एक अलग स्वर

चार कुंभ-स्थलों में से नासिक-त्र्यंबकेश्वर की कुछ खास विशेषताएँ हैं। यहाँ दो स्थानों पर स्नान होता है: नासिक शहर के पंचवटी क्षेत्र में स्थित रामतीर्थ और लगभग तीस किलोमीटर दूर त्र्यंबकेश्वर में स्थित कुशावर्त तीर्थ। परंपरा के अनुसार शैव साधु त्र्यंबकेश्वर में और वैष्णव साधु नासिक के रामतीर्थ में स्नान करते हैं।

नासिक रामायण से जुड़ा स्थान है। वनवास के दौरान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण ने गोदावरी तट पर पंचवटी में निवास किया। त्र्यंबकेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और गोदावरी का उद्गम-स्थल ब्रह्मगिरि पर्वत के पास है। इसलिए नासिक-त्र्यंबकेश्वर के कुंभ में शैव और वैष्णव परंपराएँ, रामायण की स्मृति और नदी का उद्गम, ये सभी धागे एक साथ दिखाई देते हैं। यह विशेषता इसे अन्य कुंभ-स्थलों से अलग बनाती है।