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नाशिक–त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभमेळामहाराष्ट्र शासनाची राजमुद्रा
थेट सूचना

स्नान दिनदर्शिका

सिंहस्थाचा कालावधी 31 ऑक्टोबर 2026 ते 24 जुलै 2028 असा आहे. अमृत स्नानाचे दिवस नाशिक येथे 2 ऑगस्ट, 31 ऑगस्ट आणि 11 सप्टेंबर 2027, आणि त्र्यंबकेश्वर येथे 12 सप्टेंबर 2027 असे आहेत.

स्नान तारखा

  • कार्यक्रम

    ध्वजारोहण

    ध्वजपर्व, गुरूचा सिंह राशीत प्रवेश आणि सिंहस्थ महाकुंभाचा प्रारंभ.

    31 ऑक्टोबर 2026 · दुपारी 12:02

  • मेळा कालावधी

    मुख्य मेळा कालावधी सुरू

    अधिकृत मुख्य मेळा कालावधी सुरू होतो.

    15 जून 2027 · पूर्ण दिवस

  • कार्यक्रम

    नगर प्रदक्षिणा

    अमृत स्नानांपूर्वी नाशिकभोवतीची पारंपरिक प्रदक्षिणा.

    29 जुलै 2027 · कळविण्यात येईल

  • अमृत स्नान

    पहिले अमृत स्नान

    सिंहस्थ महाकुंभाचा पहिला पवित्र स्नान दिवस.

    2 ऑगस्ट 2027 · पूर्ण दिवस

  • अमृत स्नान

    दुसरे अमृत स्नान

    सिंहस्थ महाकुंभाचा दुसरा पवित्र स्नान दिवस.

    31 ऑगस्ट 2027 · पूर्ण दिवस

  • अमृत स्नान

    तिसरे अमृत स्नान

    सिंहस्थ महाकुंभाचा तिसरा पवित्र स्नान दिवस.

    रामतीर्थ, नाशिक

    11 सप्टेंबर 2027 · पूर्ण दिवस

  • अमृत स्नान

    तिसरे अमृत स्नान

    सिंहस्थ महाकुंभाचा तिसरा पवित्र स्नान दिवस.

    कुशावर्त तीर्थ, त्र्यंबकेश्वर

    12 सप्टेंबर 2027 · पूर्ण दिवस

  • कार्यक्रम

    ध्वजावतरण (ध्वज उतरवणे)

    ध्वज उतरवून सिंहस्थ महाकुंभाची सांगता.

    24 जुलै 2028 · दुपारी 3:36

अमृत स्नान दिनदर्शिका 2027

संपूर्ण स्नान दिनदर्शिका

सिंहस्थ हा दीर्घ काळ चालणारा उत्सव असून त्यात फक्त अमृत स्नानांचेच नव्हे, तर इतरही अनेक शुभ दिवस येतात. कमी गर्दीचा दिवस निवडला, तर दर्शन अधिक शांतपणे होते आणि स्नान अधिक सुरक्षित होते.

पर्वणीदिनांकमुहूर्त
ध्वजारोहण - ध्वजपर्व, गुरूचा सिंह राशीत प्रवेश, सिंहस्थ महाकुंभ प्रारंभ31.10.2026दुपारी 12:02
प्रथम अमृतस्नान02.08.2027पूर्ण दिवस
द्वितीय अमृतस्नान31.08.2027पूर्ण दिवस
रामतीर्थ, नाशिक : तृतीय अमृतस्नान11.09.2027पूर्ण दिवस
कुशावर्त तीर्थ, त्र्यंबकेश्वर : तृतीय अमृतस्नान12.09.2027पूर्ण दिवस
ध्वजावतरण - सिंहस्थ महाकुंभ सांगता24.07.2028दुपारी 3:36

रामतीर्थ, नाशिक - पर्वकाल मुहूर्त

  • 24.07.2027
  • 29.07.2027
  • 02.08.2027
  • 15.08.2027
  • 17.08.2027
  • 28.08.2027
  • 31.08.2027
  • 05.09.2027
  • 11.09.2027
  • 26.09.2027
  • 30.09.2027
  • 11.10.2027
  • 15.10.2027
  • 25.10.2027
  • 10.11.2027
  • 13.11.2027
  • 14.11.2027
  • 24.11.2027
  • 28.11.2027
  • 09.12.2027
  • 27.12.2027
  • 26.01.2028
  • 27.01.2028
  • 28.01.2028
  • 29.01.2028
  • 30.01.2028
  • 31.01.2028
  • 01.02.2028
  • 02.02.2028
  • 03.02.2028
  • 04.02.2028
  • 05.02.2028
  • 06.02.2028
  • 07.02.2028
  • 08.02.2028
  • 10.02.2028
  • 20.02.2028
  • 21.02.2028
  • 25.02.2028
  • 27.02.2028
  • 07.03.2028
  • 21.03.2028
  • 05.04.2028
  • 09.04.2028
  • 24.04.2028
  • 05.05.2028
  • 08.05.2028
  • 20.05.2028
  • 24.05.2028
  • 25.05.2028
  • 26.05.2028
  • 27.05.2028
  • 28.05.2028
  • 29.05.2028
  • 30.05.2028
  • 31.05.2028
  • 01.06.2028
  • 02.06.2028
  • 03.06.2028
  • 07.06.2028
  • 18.06.2028
  • 22.06.2028
  • 02.07.2028
  • 06.07.2028
  • 18.07.2028

रामतीर्थ, नाशिक एकूण अमृतस्नान मुहूर्त : 65

कुशावर्त तीर्थ, त्र्यंबकेश्वर - पर्वकाल मुहूर्त

  • 05.11.2026
  • 06.11.2026
  • 09.11.2026
  • 20.11.2026
  • 23.11.2026
  • 24.11.2026
  • 15.01.2027
  • 19.01.2027
  • 21.01.2027
  • 22.01.2027
  • 03.07.2027
  • 04.07.2027
  • 14.07.2027
  • 18.07.2027
  • 31.07.2027
  • 06.08.2027
  • 09.08.2027
  • 12.08.2027
  • 16.08.2027
  • 17.08.2027
  • 23.08.2027
  • 24.08.2027
  • 28.08.2027
  • 30.08.2027
  • 05.09.2027
  • 15.09.2027
  • 27.09.2027
  • 29.09.2027
  • 14.10.2027
  • 26.10.2027
  • 10.11.2027
  • 13.11.2027
  • 21.03.2028
  • 27.03.2028
  • 03.04.2028
  • 07.04.2028
  • 29.04.2028
  • 01.05.2028
  • 02.07.2028
  • 06.07.2028
  • 21.07.2028

कुशावर्त तीर्थ, त्र्यंबकेश्वर एकूण अमृतस्नान मुहूर्त : 41

मुहूर्त ठरवण्याची प्रक्रिया

सिंहस्थाच्या तारखा कोण ठरवतो, असा प्रश्न वारंवार विचारला जातो. प्रत्यक्षात ही प्रक्रिया एका संस्थेची नसून अनेक संस्थांच्या संवादातून पार पडते. स्थानिक पुरोहित संघ आणि पंचांगकर्ते ग्रहस्थितीचे गणित मांडतात. आखाडा परिषदेचे प्रतिनिधी आणि महंत ते गणित स्वीकारतात आणि आपल्या आखाड्यांची मते मांडतात. राज्य शासन, विभागीय आयुक्त, पोलीस आणि कुंभमेळा प्राधिकरण यंत्रणांच्या सुविधा आणि सुरक्षेच्या दृष्टीने वेळापत्रक अंतिम करतात. ही बैठक सामान्यतः मेळ्याच्या काही वर्षे आधी होते. आगामी सिंहस्थाचे वेळापत्रक राज्य शासनाने साधू-महंत आणि मुख्यमंत्र्यांच्या उपस्थितीत जाहीर केले, असे माध्यमांनी नोंदवले आहे. त्याच घोषणेत एकादशी, पौर्णिमा, अमावास्या आणि वैधृती-व्यतिपात योगाचे दिवस पर्वणी आणि दर्शनाचे दिवस म्हणून गणले जातील, असेही सांगितले गेले.

सिंहस्थ: ज्योतिषीय आधार